रग्बी विश्व कप के एक कमेंटेटर की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
लेखक: Dallen Stanford, रग्बी विश्व कप कमेंटेटर और Broadcast Academy के संस्थापक

पहली बार जब किसी ने मुझे माइक थमाया, तो मुझे ठीक से पता नहीं था कि मैं क्या कर रहा हूँ। यह 15 साल पहले की बात है। मुझमें जुनून था और मैं खेल को समझता था, लेकिन ब्रॉडकास्टिंग का हुनर (तैयारी, लय, कहानी कहना) मैंने काम करते-करते सीखा।
तब से मैंने फ़्रांस में रग्बी विश्व कप 2023, जापान में रग्बी विश्व कप 2019 और 2018 व 2022 के सेवन्स विश्व कप में कमेंट्री की है, और एक दशक तक सेवन्स वर्ल्ड सीरीज़ के साथ दुनिया भर में घूमा हूँ। मेरी कमेंट्री ESPN, CBS Sports Network, Fox Sports, NBC और Peacock पर प्रसारित हुई है।
कोई भी यह जानकर पैदा नहीं होता। जिस भी कमेंटेटर को आप पसंद करते हैं, उसका भी एक पहला मैच था, घबराहट के साथ और किसी नाम के ग़लत उच्चारण के साथ। अच्छी ख़बर यह है कि कमेंट्री सीखी जा सकती है। अगर मैं आज शुरुआत करता, तो यही रास्ता अपनाता।
रग्बी कमेंटेटर क्या करता है?
रग्बी कमेंट्री एक काम नहीं, तीन काम हैं, और सबसे अच्छे प्रसारणों में ये तीनों मिलकर काम करते हैं।
- प्ले-बाय-प्ले (मुख्य कमेंटेटर)। वह आवाज़ जो खेल को घटते ही बयान करती है। अगर कोई आँखें बंद कर ले, तब भी उसे मैच का हर पल दिखाई देना चाहिए।
- एक्सपर्ट (एनालिस्ट)। खेल के पीछे का क्यों समझाता है: रणनीति, पैटर्न, कोचिंग के फ़ैसले। अक्सर कोई पूर्व खिलाड़ी या कोच होता है, लेकिन ज़रूरी नहीं।
- साइडलाइन रिपोर्टर। मैदान के किनारे से चोटों की ख़बरें, सब्स्टिट्यूशन, और मैच से पहले, हाफ़-टाइम पर और फ़ाइनल व्हिसल के बाद इंटरव्यू। इस इंडस्ट्री में आने के सबसे अच्छे रास्तों में से एक।

पता लगाइए कि कौन-सी भूमिका आपके लिए सही है, लेकिन तीनों का अभ्यास करें। ब्रॉडकास्टर उन लोगों को महत्व देते हैं जो किसी भी कुर्सी पर बैठ सकें।
क्या रग्बी कमेंटेटर बनने के लिए डिग्री चाहिए?
नहीं। कोई एक तय योग्यता नहीं है। कुछ कमेंटेटर पत्रकारिता या रेडियो से आते हैं, कुछ पूर्व खिलाड़ी हैं, और बहुत-से लोगों ने बस क्लब मैचों में कमेंट्री शुरू की और हर हफ़्ते बेहतर होते गए। हर अच्छे कमेंटेटर के पास खेल की गहरी समझ, तैयारी की पक्की आदतें और माइक के पीछे ढेर सारा अभ्यास होता है।
स्टेप 1: खेल को और जिस टूर्नामेंट की कमेंट्री कर रहे हैं, उसे जानें
आपको रग्बी इतनी अच्छी तरह समझनी चाहिए कि आप उसे लाइव समझा सकें। खेल के नियम और टूर्नामेंट के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए हर प्रतियोगिता की कमेंट्री से पहले उसके नियम देखने की आदत डालें। मैच कमेंटेटर की नज़र से देखें: पैटर्न, सेट-पीस की टक्कर और मैच का रुख़ बदलने वाले पलों पर ध्यान दें।
स्टेप 2: प्रोफ़ेशनल की तरह तैयारी करें
तैयारी ही अच्छे कमेंटेटर को महान कमेंटेटर से अलग करती है। जो ब्रॉडकास्टर बिना मेहनत के लगते हैं, उन्होंने किकऑफ़ से पहले पूरा काम किया होता है। हर मैच के लिए मैं:
- दोनों टीमों को गहराई से समझता हूँ। सभी 23 खिलाड़ी, सिर्फ़ शुरुआती खिलाड़ी नहीं: पोज़िशन, नंबर, अहम खिलाड़ी, आख़िरी समय के बदलाव और 50वें अंतरराष्ट्रीय मैच जैसी उपलब्धियाँ।
- कहानी ढूँढता हूँ। दाँव पर क्या है? इन टीमों का आपस में क्या इतिहास है? किन खिलाड़ियों और कोचों की अपनी कहानी है? पाँच-छह कहानियाँ तैयार रखकर जाएँ।
- उच्चारण पक्का करता हूँ। खिलाड़ी का नाम उसके लिए, उसके परिवार के लिए और उसके समुदाय के लिए मायने रखता है। जिस नाम को लेकर पक्का न हों, उसे मैच से पहले जाँच लें और अपने नोट्स में उसका उच्चारण लिख लें।
- रन शीट जानता हूँ। हर प्रोफ़ेशनल प्रसारण एक तय क्रम से चलता है: आप कब ऑन-एयर हैं, राष्ट्रगान कब होंगे, ब्रेक कब आएँगे।

स्टेप 3: हर हफ़्ते प्ले-बाय-प्ले का अभ्यास करें
प्ले-बाय-प्ले ब्रॉडकास्टिंग का सबसे कठिन हुनर है। आप एक साथ देखते, समझते, बोलते और सोचते हैं, और दोबारा मौका नहीं मिलता। इसे एक फ़ॉर्मूले से आसान रखें: एक्शन, खिलाड़ी, नतीजा। क्या हो रहा है, कौन कर रहा है और नतीजा क्या है।
फिर सीखें कि कब चुप रहना है। जब ट्राई होता है, तो बड़ी लाइन बोलिए और फिर दर्शकों को कहानी कहने दीजिए। ख़ामोशी कमेंटेटर का सबसे कम इस्तेमाल होने वाला औज़ार है।

अभ्यास का सबसे आसान तरीका: किसी मैच के रीप्ले की आवाज़ बंद करें, अपनी कमेंट्री रिकॉर्ड करें और फिर सुनें। आपको वे पाँच ग़लतियाँ सुनाई देंगी जो लगभग हर नया कमेंटेटर करता है:
- ज़रूरत से ज़्यादा बोलना और हर ख़ामोशी भर देना
- बहुत अस्पष्ट होना (“वह दौड़ता है, पास देता है, वे स्कोर करते हैं”)
- “अं” और “मतलब” जैसे भराव वाले शब्द
- स्कोर और समय बताना भूल जाना
- अपने साथी कमेंटेटर की बात के ऊपर बोलना
स्टेप 4: अपनी आवाज़ का ख़याल रखें
आपकी आवाज़ आपका वाद्य है। पानी पीते रहें, हर सेशन से पहले आवाज़ का वॉर्म-अप करें, लंबे प्रसारण के बाद आराम करें और ऑफ़-एयर चिल्लाएँ नहीं। आवाज़ की प्रोजेक्शन वॉल्यूम नहीं, साँस का सहारा है, इसीलिए मैं हमेशा खड़े होकर कमेंट्री करता हूँ। किसी बड़े टूर्नामेंट से पहले मैं शराब नहीं पीता, ताकि वीकेंड के लिए मेरी आवाज़ तरोताज़ा रहे।
स्टेप 5: अपनी कमेंट्री डेमो रील बनाएँ
डेमो रील ब्रॉडकास्टिंग में आपका रिज़्यूमे है। इसे छोटा रखें, अपनी सबसे अच्छी कमेंट्री से शुरुआत करें और विविधता दिखाएँ: एक बड़ा पल, थोड़ा बिल्ड-अप प्ले और, हो सके तो, थोड़ा विश्लेषण या एक इंटरव्यू। जैसे-जैसे आप बेहतर हों, इसे अपडेट करते रहें।
स्टेप 6: अपने पहले मैच पाएँ
छोटे से शुरू करें और अनुभव जुटाएँ। क्लब मैच, स्कूल और कॉलेज के मैच, लोकल लाइवस्ट्रीम और कम्युनिटी रेडियो पर कमेंट्री करें। सोशल मीडिया पर क्लिप्स शेयर करें, फ़ीडबैक माँगें और दूसरे कमेंटेटरों से जुड़ें। मौके अक्सर उन्हीं लोगों के ज़रिए आते हैं जिनसे आप रास्ते में मिलते हैं।

क्या आप हिंदी में रग्बी कमेंटेटर बन सकते हैं?
हाँ, और यह एक बड़ा मौका है। रग्बी पूरी दुनिया में बढ़ रही है, और ब्रॉडकास्टरों को ऐसी आवाज़ें चाहिए जो खेल की कमेंट्री हिंदी, फ़्रेंच, स्पैनिश, इतालवी, जापानी, पुर्तगाली, अफ़्रीकान्स, चीनी, जॉर्जियाई, पोलिश, रोमानियाई और कई दूसरी भाषाओं में कर सकें। हर भाषा में हुनर वही है: तैयारी, लय, कहानी कहना और यह जानना कि कब पल को साँस लेने देना है।
Broadcast Academy में आपका सफ़र
मैंने Broadcast Academy इसलिए बनाई ताकि आपको वह रोडमैप मिले जो मेरे पास नहीं था। 30 से ज़्यादा देशों के, 14 से 70 साल की उम्र के Broadcast Academy ग्रेजुएट्स यह कदम उठा चुके हैं, और उनमें से 35 से ज़्यादा आज पेड कमेंट्री का काम कर रहे हैं। जहाँ से आपके लिए सबसे सही हो, वहीं से शुरू करें:
Broadcast Foundations शुरू करें →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रग्बी कमेंटेटर बनने में कितना समय लगता है?
यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी बार अभ्यास करते हैं। जो कमेंटेटर हर हफ़्ते खुद को रिकॉर्ड करके सुनते हैं, वे सबसे तेज़ी से सुधरते हैं। पहले पेड मौके आमतौर पर तब मिलते हैं जब आप असली मैचों से डेमो रील बना लेते हैं।
क्या मुझे पूर्व खिलाड़ी होना ज़रूरी है?
नहीं। पूर्व खिलाड़ी अक्सर एनालिस्ट बनते हैं, लेकिन प्ले-बाय-प्ले और साइडलाइन रिपोर्टिंग में खेलने के अनुभव से ज़्यादा तैयारी, आवाज़ और बातचीत का हुनर मायने रखता है।
शुरू करने के लिए कौन-सा सामान चाहिए?
एक कंप्यूटर, एक ठीक-ठाक माइक और इंटरनेट कनेक्शन काफ़ी है, जिससे आप रीप्ले पर अभ्यास कर सकें और अपनी पहली डेमो रील रिकॉर्ड कर सकें।